महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच सियासी वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ और ‘ऑपरेशन वुल्फ’ के नाम से चल रही इस राजनीतिक खींचतान में फिलहाल बाजी एकनाथ शिंदे के पक्ष में जाती दिखाई दे रही है। नागपुर से आई ताजा राजनीतिक हलचल ने उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका दिया है।
शिवसेना (यूबीटी) के नागपुर शहर प्रमुख नितिन तिवारी ने अपने कई सहयोगियों और पदाधिकारियों के साथ ठाकरे गुट का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया। मुंबई में सांसद श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में यह राजनीतिक शामिलीकरण हुआ। नितिन तिवारी के साथ शहर सचिव, युवा सेना के पदाधिकारी और कामगार सेना से जुड़े कई नेता भी शिंदे गुट में शामिल हो गए। इससे नागपुर में उद्धव ठाकरे के संगठन को कमजोर माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के उस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें उन्होंने पार्टी को पूरी तरह मजबूत बताते हुए ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं को खारिज किया था। वहीं उन्होंने विरोधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन वुल्फ’ शुरू करने की बात कही थी। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद कई नेताओं के पाला बदलने से उनके दावों की धार कमजोर पड़ती नजर आई।
इसी बीच 14 जून को मुंबई में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई सांसदों की बैठक में नौ में से केवल चार सांसदों की मौजूदगी ने भी पार्टी के भीतर चल रही हलचल की ओर इशारा किया। बाकी सांसदों ने ऑनलाइन या फोन के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे और ठाकरे के बीच सियासी मुकाबला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है।
India
ऑपरेशन टाइगर की चाल सफल, उद्धव ठाकरे को फिर मिली सियासी शिकस्त...
Source: Insight Now