पश्चिम बंगाल के चर्चित संदेशखाली मामले में पूर्व टीएमसी नेता शेख शाहजहां की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कोलकाता की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने शेख शाहजहां, उसके भाई शेख आलमगीर और दो करीबी सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही इस मामले में आरोपियों को जल्द जमानत मिलने की संभावनाएं भी लगभग खत्म होती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे कई सबूत मिले, जिनसे पता चला कि शेख शाहजहां ने राजनीतिक संरक्षण और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए संदेशखाली इलाके में दबदबा कायम किया था। उस पर जमीनों पर अवैध कब्जा करने, मछली कारोबार से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियों, ईंट भट्ठों पर नियंत्रण स्थापित करने, धमकी और दबाव के जरिए ठेके हासिल करने तथा अवैध वसूली के आरोप हैं। ईडी के अनुसार, इन गतिविधियों से अर्जित काली कमाई को वैध दिखाने के लिए उसे मछली कारोबार से होने वाली आय के रूप में पेश किया गया। इस काम में उसके कई करीबी सहयोगियों की भी भूमिका सामने आई है। एजेंसी ने 27 मई 2024 को इस मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिस पर अदालत ने 3 जून 2024 को संज्ञान लिया था। जांच के दौरान शेख शाहजहां और उससे जुड़े लोगों की करीब 27 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की जा चुकी हैं। अब अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी कार्रवाई का अगला चरण शुरू हो गया है, जिससे शेख शाहजहां और उसके सहयोगियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।