दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लगातार कमजोर परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा निदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। नौवीं और 11वीं कक्षा में 66 प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले 63 सरकारी स्कूलों को विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है। इन स्कूलों के शैक्षणिक स्तर में सुधार लाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। नई व्यवस्था के तहत अधिकारी हर 15 दिन में संबंधित स्कूलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों की जिम्मेदारी, छात्रों की प्रगति और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था का भी आकलन करेंगे। विभाग का उद्देश्य कमजोर प्रदर्शन के पीछे की वास्तविक वजहों को पहचानकर उनका समाधान करना है। निरीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कमजोर विषयों की पहचान की गई है या नहीं, पढ़ाई में पिछड़ रहे छात्रों के लिए अलग से शैक्षणिक योजना बनाई गई है या नहीं और शिक्षक अपनी डायरी नियमित रूप से अपडेट कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा अभिभावकों से संवाद, सीबीएसई के सैंपल पेपर और एनसीईआरटी की पुस्तकों का उपयोग, आईसीटी लैब और विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थिति तथा शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के खाली पदों की भी समीक्षा की जाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नौवीं और 11वीं कक्षाएं बोर्ड परीक्षाओं की नींव होती हैं। इन कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होने से अगले वर्ष 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है। इसी उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने इस निगरानी अभियान की शुरुआत की है।