बिजनेस डेस्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 27 जून 2026 को WTI क्रूड ऑयल करीब 70.24 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 71.99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव कम होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत आई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की तीन मुख्य वजहें हैं। पहली, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से बाजार में स्थिरता लौटी है। दूसरी, ईरान को मिली अस्थायी राहत के कारण तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंता घट गई है। तीसरी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के सुरक्षित रूप से फिर खुलने से वैश्विक सप्लाई सामान्य होने लगी है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकारी तेल कंपनियों के पास अब भी वह कच्चा तेल मौजूद है, जिसे उन्होंने पहले ऊंची कीमतों पर खरीदा था। जब तक यह महंगा स्टॉक खत्म नहीं हो जाता, तब तक खुदरा ईंधन की कीमतों में कटौती की संभावना कम है।
जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं और तेल कंपनियों का महंगा स्टॉक खत्म हो जाता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि भारत में ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन का भी इन पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक बाजार में आई गिरावट का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है।
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Crude Oil Prices Today: इंटरनेशनल मार्केट में तेल फिसला, भारत में राहत का इंतजार
Source: Insight Now