महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। संयुक्त ऑपरेशन के दौरान पुलिस और सीआरपीएफ ने जंगल के भीतर जमीन के नीचे छिपाकर बनाई गई माओवादियों की अवैध हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में हथियार बनाने का सामान और मशीनें बरामद की गईं, जिन्हें मौके पर ही बम निरोधक दस्ते (BDDS) ने सुरक्षा कारणों से नष्ट कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, गढ़चिरौली में माओवादी गतिविधियां पहले की तुलना में काफी कमजोर पड़ चुकी हैं, लेकिन संगठन अब भी जंगलों में हथियार और विस्फोटक सामग्री छिपाकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था। खुफिया सूचना मिलने के बाद 26 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के निर्देशन में विशेष अभियान दल, प्राणहिता यूनिट, बीडीडीएस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। 27 जून को चलाए गए इस अभियान में बड़ी मात्रा में हथियार निर्माण से जुड़ी सामग्री बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान लगभग 5 से 6 टन वजनी लेथ मशीन, 150 क्लेमोर और बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) पाइप, 220 से अधिक 12-बोर गन बैरल, 20 राइफल रॉड मेटल पट्टियां तथा ड्रिलिंग और कटिंग मशीनें बरामद की गईं। जांच में सामने आया कि इन उपकरणों का इस्तेमाल माओवादी हथियार तैयार करने के लिए करते थे। यह अभियान आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली गुप्त जानकारी के आधार पर ‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ के तहत चलाया गया। इससे पहले मई 2026 में भी गढ़चिरौली पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में माओवादियों की हथियार निर्माण इकाइयों का भंडाफोड़ कर बड़ी सफलता हासिल की थी।